dhanbad kendua road subsidencedhanbad kendua road subsidence

कोयलांचल की धड़कन कहलाने वाली सड़कें और घर अब मौत का साया बन चुके हैं।

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यह एक गंभीर और चिंताजनक मुद्दा है। धनबाद-झरिया की धरती अब धीरे-धीरे अपना धैर्य खो रही है।

धनबाद-कतरास रोड पर स्थित केंदुआ थाना और बाजार के पास की मुख्य सड़क का एक हिस्सा अचानक नीचे धंसने लगा है। गनीमत यह रही कि यह पूरी तरह से धंसा नहीं है, अन्यथा कोई बड़ी जनहानि हो सकती थी। फिलहाल एहतियात के तौर पर प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर दी है, लेकिन इस घेराबंदी के भीतर मौत का जो खौफ छिपा है, वह किसी भी वक्त बाहर आ सकता है।

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महत्वपूर्ण मार्ग और प्रशासनिक लापरवाही

यह मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि एक लाइफलाइन है जो सीधे NH-19 से जाकर मिलती है। हज़ारों लोगों का रोज़मर्रा का सफ़र इसी सड़क से होकर गुज़रता है। सवाल यह है कि आखिर इस अनदेखी के पीछे कौन है?

  • बीसीसीएल (BCCL) प्रबंधन की भूमिका: क्या खदानों के नीचे की सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है?
  • ओपन कास्ट माइनिंग: क्या बेतहाशा खनन के कारण धरती के नीचे की ज़मीन खोखली हो गई है?

प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि दुर्घटना होने के इंतज़ार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

सोनारडीह से लोयाबाद तक: खौफ का सिलसिला

धनबाद में भू-धंसान की घटनाएं अब ‘न्यू नॉर्मल’ बन चुकी हैं। कतरास के सोनारडीह में हुई भीषण धंसान की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। लोयाबाद हो या धनबाद के अन्य इलाके, ज़मीन के फटने का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

झरिया में भी मौत की दस्तक

झरिया, जिसे भू-धंसान का केंद्र माना जाता था, अब वहां की स्थिति और भी विकट हो गई है। खास तौर पर किड्स गार्डन स्कूल के पास के इलाका यानी चौथाई कुल्ही, अब रहने लायक नहीं बचा है। यहाँ की ज़मीन पर गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और लोगों के घरों की दीवारों में आई दरारें इस बात का सबूत हैं कि ज़मीन कभी भी अपना मुंह खोल सकती है। यह इलाका अब ‘डेंजर ज़ोन’ में तब्दील हो चुका है।

ग्राउंड जीरो से हकीकत का सामना

क्या हम तब तक इंतज़ार करेंगे जब तक कोई बड़ी दुर्घटना न हो जाए? कोयलांचल की ये दरारें केवल ज़मीन की नहीं, बल्कि उस खोखली व्यवस्था की भी हैं, जिसने धनबाद को केवल ‘कोयला’ देने वाली मशीन समझा, लेकिन इसे बचाने के लिए कोई ठोस इंतज़ाम नहीं किए।