झरिया में ‘यमराज’ बना बेकाबू हाइवा: शादी में जा रही महिला को कुचला, मौके पर ही दर्दनाक मौत!

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झरिया (धनबाद): झरिया-केंदुआ मुख्य मार्ग एक बार फिर रक्त रंजित हो उठा है। यहाँ की सड़कों पर दौड़ते भारी वाहन अब आम जनता के लिए ‘काल’ साबित हो रहे हैं। ताज़ा मामला ISL स्कूल के समीप का है, जहाँ एक अनियंत्रित हाइवा ने बाइक सवार परिवार को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण टक्कर में सुनीता महतो (निवासी: बलियापुर, कुईलुडीह) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनके पति शांति महतो और पुत्र बाल-बाल बच गए।

शादी की खुशियां मातम में बदलीं

जानकारी के अनुसार, शांति महतो अपनी पत्नी और बच्चे के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर महूदा में एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। उन्हें क्या पता था कि घर से निकला यह सफर आखिरी साबित होगा। हाइवा (संख्या JH01CS 8123) की जोरदार टक्कर ने पल भर में सब कुछ तबाह कर दिया। घटना के बाद का मंजर इतना खौफनाक था कि देखने वालों की रूह कांप गई।

प्रशासन की लापरवाही या सोची-समझी साजिश?

ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है, और उनका गुस्सा जायज भी है। स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि:

  • हटाए गए स्पीड ब्रेकर: कुछ महीने पहले इस मार्ग पर लगे स्पीड ब्रेकर्स को जेसीबी (JCB) से जानबूझकर तुड़वा दिया गया था। इसके बाद से ही भारी वाहनों की रफ्तार पर लगाम खत्म हो गई है।
  • अवैध परिचालन: आरोप है कि कई हाइवा बिना वैध लाइसेंस वाले चालकों और खलासी के भरोसे चल रहे हैं।
  • ओवरलोडिंग का खेल: कोयला लोड कर साइडिंग की ओर भागते ये हाइवा सड़कों पर रेस लगाते हैं, जिससे पैदल चलने वाले और बाइक सवारों की जान हमेशा खतरे में रहती है।

ग्रामीणों की दो टूक: “अब और मौतें बर्दाश्त नहीं”

उग्र ग्रामीणों ने मुआवजे के साथ-साथ प्रशासन के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं:

  • घटनास्थल और संवेदनशील मोड़ों पर पुनः स्पीड ब्रेकर तत्काल लगाए जाएं।
  • इस मार्ग पर भारी वाहनों (Heavy Vehicles) के परिचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगे या उनका वैकल्पिक रूट तय हो।
  • ओवरलोड और तेज रफ्तार वाहनों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

निष्कर्ष: कब जागेगा प्रशासन?

झरिया में यह कोई पहली घटना नहीं है। ‘ब्लैक स्पॉट’ बनते जा रहे इस मार्ग पर आखिर प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार क्यों कर रहा था? स्कूल के समीप इस तरह की घटना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।क्या एक मासूम बच्चे के सिर से मां का साया उठ जाने के बाद अब व्यवस्था की नींद टूटेगी? या फिर कुछ दिनों के शोर के बाद फिर से वही “रफ्तार का तांडव” शुरू हो जाएगा?

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