कुमार गाँव का माँ नेतुला मंदिर का इतिहास (Maa Netula Mandir) : जहाँ आज भी ट्रैक्टर से पहुँचती है बारातें
जमुई (बिहार): बिहार के जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड के कुमार ग्राम में स्थित माँ नेतुला मंदिर ( Maa Netula Mandir ) सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों भक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक है। इसे देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

गाँव की मिट्टी और सादगी का अनुभव
कुमार गाँव की सीमा में प्रवेश करते ही आपको ठेठ ग्रामीण परिवेश का अहसास होने लगता है। मुख्य मार्ग से लगभग 1 किलोमीटर अंदर स्थित यह मंदिर शांत और सरल जीवन की झलक पेश करता है। गाँव में घुसते ही एक सरकारी महाविद्यालय (कॉलेज) है, जिसका उपयोग अक्सर शादी समारोहों में आने वाले मेहमानों के ठहरने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, यहाँ कुछ छोटे प्राइवेट लॉज भी उपलब्ध हैं।
मंदिर परिसर और आसपास की व्यवस्थाएं
मंदिर के चारों तरफ एक मजबूत बाउंड्री वॉल है, जिसके भीतर मुख्य मंदिर के साथ-साथ कई अन्य छोटे मंदिर भी स्थित हैं। मंदिर की शुद्धता और मर्यादा का विशेष ध्यान रखा जाता है; श्रद्धालुओं के लिए जूता-चप्पल बाउंड्री के एकदम बाहर खोलना अनिवार्य है।
- तालाब और प्राकृतिक दृश्य: मंदिर के बिल्कुल बगल में एक बड़ा तालाब है, जिसमें मछलियाँ तैरती नजर आती हैं। तालाब के पानी में हल्का हरापन है और इसमें नल का पानी भी भरा जाता है। मंदिर के पीछे और तालाब के किनारे पुरुषों और महिलाओं के लिए निशुल्क शौचालय और स्नान के लिए नल की समुचित व्यवस्था है।
- बाजार और सुविधाएं: मंदिर के आसपास पूजा सामग्री की दर्जनों दुकानें सजी रहती हैं। यहाँ कुछ ऐसे होटल भी हैं जो न केवल यात्रियों को खाना खिलाते हैं, बल्कि शादियों में कैटरिंग (खाना खिलाने) का टेंडर भी लेते हैं।
- बलि प्रथा: शक्ति उपासना के इस केंद्र में प्राचीन परंपरा के अनुसार बकरी की बलि भी दी जाती है।
आज भी जीवंत है पुरानी परंपराएं
आधुनिकता के इस दौर में भी यहाँ की परंपराएं अपनी जड़ें जमाए हुए हैं। यहाँ आज भी ग्रामीण क्षेत्रों से लोग शादी समारोहों में शामिल होने के लिए ट्रैक्टर का उपयोग करते हैं, जो इस इलाके की सादगी को दर्शाता है। मंदिर के आसपास फैले हरे-भरे खेत इसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देते हैं।
धार्मिक महत्ता और आस्था : ऐतिहासिक महत्व
मंदिर के पुजारी के अनुसार, यह स्थान अत्यंत प्राचीन है। शक्तिपीठ की मान्यता: हिंदू धर्म के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सती के शरीर को खंडित किया था, तब माता का पीठ भाग यहाँ गिरा था। इसी कारण यहाँ मां नेतुला के पीठ की पूजा की जाती है। हालिया चमत्कार: और कुछ समय पहले मंदिर के पास स्थित तालाब की खुदाई के दौरान महादेव और माता पार्वती का एक विशाल शिवलिंग मिला था, जिसे सुरक्षित रखा गया है और इसकी प्राण प्रतिष्ठा की गई।
नेत्र रोगों से मुक्ति के लिए यह मंदिर पूरे भारत में विख्यात है। मन्नत पूरी होने पर भक्त यहाँ चांदी की आँखें चढ़ाते हैं। साथ ही, यह स्थान भगवान महावीर की साधना स्थली के रूप में भी जाना जाता है।
नवरात्रि का महत्व: शारदीय नवरात्रि के दौरान यहाँ 20,000 से अधिक महिलाएं कष्ट (विशेष व्रत) रखती हैं। महाष्टमी के दिन यहाँ विशेष पूजा और बलि का विधान है।
जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान महावीर ने जब गृह त्याग किया था, तब उन्होंने अपनी पहली रात इसी मंदिर के पास स्थित वट वृक्ष के नीचे बिताई थी। मां नेतुला माता को भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने वाली देवी माना जाता है। यहाँ विशेष रूप से नेत्र और पुत्र प्राप्ति की कामना से बड़ी संख्या मएब श्रद्धालु आते हैं। इस मंदिर का भी तक 3 बार जीर्णोंधार किया जा चुका है। शुरुआत में यह एक झोपड़ी थी, फिर ईंटों का बना और अब यह एक भव्य मंदिर का रूप ले चुका है।
कैसे पहुँचें?
अगर आप धनबाद से है तो गिरिडीह और चकाई होते हुए सड़क मार्ग से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। चकाई से आगे का रास्ता प्राकृतिक सुंदरता से भरा है, लेकिन रात के समय कोयला लदे ट्रकों के कारण लगने वाले जाम का ध्यान रखना जरूरी है।
अगर आप एक ऐसी जगह की तलाश में हैं जहाँ भक्ति के साथ-साथ गाँव की शुद्धता और सादगी महसूस हो, तो माँ नेतुला का दरबार और कुमार गाँव की गलियाँ आपका स्वागत करती हैं।
1. धनबाद से मां नेतुला मंदिर (सिकंदरा) का सफर
भीषण गर्मी, कोयला बेल्ट का जाम और माँ का दरबार: धनबाद से सिकंदरा का सफर।
“कोयला नगरी धनबाद से बिहार के जमुई जिले में स्थित प्रसिद्ध ‘मां नेतुला मंदिर’ के बीच का 200 किलोमीटर का यह सफर जितना आध्यात्मिक है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी।”
2. रास्ते की चुनौतियां
“अप्रैल की चिलचिलाती गर्मी और पारा 40 के पार। जब गाड़ी का एसी साथ छोड़ दे, तो यह सफर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं लगता। रास्ते में गिरिडीह पार करते ही बटिया घाटी का नजारा तो सुंदर है, लेकिन लू के थपेड़े आपकी परीक्षा लेते हैं।”
3. चकई मोड़ का स्वाद
दोपहर के खाने के लिए हम रुके चकाई मोड़ पर। यहाँ ₹60 प्लेट चावल-दाल तो मिला, लेकिन स्वाद और क्वालिटी के मामले में यह हमारे धनबाद के ढाबों से काफी पीछे लगा। हालांकि, इस गर्मी में ताजे खीरे का सलाद ही सबसे बड़ा सहारा बना।”
4. ट्रैफिक और जाम का अनुभव
Dhadkitanr के पास ट्रकों की लंबी लाइन या बीच सड़क पर खराब गाड़ी।
“सफर में बाधाएं भी कम नहीं थीं। कहीं सड़क मरम्मत का काम, तो कहीं बीच सड़क पर खराब हुए वाहनों ने रफ्तार रोकी। खासकर रात के समय नो-एंट्री खुलने के बाद कोयला लदे ट्रकों का ‘जैसे-तैसे’ खड़ा होना जाम की बड़ी वजह बनता है।”
5. मंजिल: मां नेतुला मंदिर, सिकंदरा
मां नेतुला मंदिर का भव्य प्रवेश द्वार, श्रद्धालु और गर्भगृह की झलक।
“घंटों के सफर और थकान के बाद जब हम सिकंदरा के प्रसिद्ध मां नेतुला मंदिर पहुंचे, तो सारी थकान मिट गई। नेत्र रोग निवारण के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर की मान्यता पूरे देश में है। यहाँ की शांति और भक्ति का माहौल आपके दिल को छू लेगा।”
“तो यह था हमारा धनबाद से सिकंदरा तक का अनुभव। अगर आप भी यहाँ आने का प्लान बना रहे हैं, तो कोशिश करें कि रात का सफर करें या गाड़ी का एसी दुरुस्त रखें! जय मां नेतुला।”
जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड के कुमार गांव में स्थित मां नेतुला मंदिर में घटी एक कथित चमत्कारिक घटना।
- घटना: शंकर कुमार नाम के एक युवक ने अनजाने में मंदिर परिसर में उस जगह थूक दिया था जहाँ बली दी जा रही थी।
- प्रभाव: परिवार के अनुसार, इस घटना के बाद युवक की आंखों की रोशनी चली गई और उसकी आवाज भी बंद हो गई (कंठ बंद हो गया) डॉक्टर से इलाज कराने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ।
- सुधार: जब युवक और उसका परिवार मां नेतुला के दरबार में आकर सेवा करने लगे, तो धीरे-धीरे उसकी आंखों की रोशनी वापस आने लगी और उसने बोलना भी शुरू कर दिया।
- वर्तमान स्थिति: युवक और उसका पूरा परिवार पिछले कई दिनों से मंदिर में ही रहकर मां की सेवा कर रहा है। आज युवक हल्की आवाज में बोल पाता है।